देवर को पटाकर चूत चुदवाई

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम प्रीति है. में शादीशुदा हूँ और मेरी शादी के 1 साल बाद की एक घटना आज में आपको बताती हूँ. में अपने पति के साथ रहती थी. मेरे घर में हम दो ही लोग रहते थे, वैसे में बहुत सेक्सी हूँ, लेकिन अपने पति से संतुष्ट थी, वो भी सेक्स में बहुत अच्छे है. हाँ सेक्स भी सदा एक जैसा होकर रह गया था, एकदम रुटीन और अच्छा लगता था.

एक दिन एक पत्र पढ़कर वो बोले कि प्रीति मेरा एक कजिन, जो नजदीक के छोटे से गाँव में रहता है, उसकी एस.एस.सी की एग्जॉम का सेंटर इस शहर में आया है, तो वो पढ़ने के लिए और एग्जॉम देने के लिए इसी शहर में आ रहा है. अगर वो कुछ दिन यहाँ रहे तो तुम्हें कोई एतराज तो नहीं है ना? तो मैंने कहा कि भला मुझे क्या ऐतराज होगा? आपका भाई है तो मेरा तो देवर हुआ ना और देवर के आने से भाभी को क्या ऐतराज हो सकता है? और फिर वो आ गया, उसका नाम राजा (राजेश) था, वो करीब 18 साल का होगा, हाईट 5 फुट 8 इंच और मजबूत कद था, वो मोटा नहीं, लेकिन कसा हुआ बदन था, हल्की सी मूंछे भी थी.

अब घर में थोड़ी चहल पहल हो गयी थी. अब सुबह का ब्रेकफास्ट हम सब में, पति और राजा एक साथ करते थे. में पहले उनके ऑफिस जाने के बाद घर में अकेली हुआ करती थी, लेकिन अब राजा भी था, वो दिनभर मन लगाकर पढ़ाई करता था. में भी उसे ज़्यादा परेशान नहीं करती थी, उसे पढ़ने देती थी, लेकिन लंच और दोपहर की चाय हम साथ में पीते थे. फिर दोपहर को जब में नींद से उठती तो उसके रूम की तरफ चली जाती और पूछती कि पढ़ाई कैसी हो रही है?

वो कहता कि ठीक हो रही है और में पूछती कि चाय पीयोगे ना? तो वो कहता कि हाँ और फिर में चाय बनाने चली जाती. फिर चाय पीते समय हम दोनों बातें करते थे, लेकिन उस दिन जब मेरी दोपहर की नींद जल्दी ही पूरी हो गयी थी और फिर जब में उसके रूम की तरफ गयी. दरवाज़ा बंद था और कमरे से कुछ आवाज आ रही थी, तो में रुक गयी और सुनने लगी.

अब कमरे से आ आ की आवाज आ रही थी, तो मुझे कुछ समझ में नहीं आया की अंदर क्या हो रहा है? अब में दरवाज़ा नॉक करने वाली थी कि तभी मुझे ख्याल आया कि खिड़की से देख लूँ, उस रूम की एक खिड़की हॉल में खुलती थी, वो भी बंद थी, लेकिन पूरी लगी नहीं थी.

मैंने हल्का सा धक्का दिया और वो खिड़की थोड़ी सी खोल दी और फिर रूम का नज़ारा देखा तो बस देखती ही रह गयी. अब राजा अपने सारे कपड़े उतारकर बिल्कुल नंगा खड़ा था, उसका लंड पूरा तना हुआ था. अब वो अपना लंड अपने हाथ में लिए हुआ था और ज़ोर-ज़ोर से उससे खेल रहा था. अब मेरी आँखें झपकना भूल गयी थी और मेरे सीने की धड़कन बढ़ गयी थी.

अब मेरे सामने एक 18 साल का जवान लड़का अपने हाथ में तना हुआ लंड लेकर हस्थमैथुन कर रहा था. मैंने मर्दो के हस्थमैथुन के बारे में सुन रखा था, लेकिन आज में उसे अपनी आँखों से देख रही थी, ओह क्या सीन था? पूरी जवानी में आया हुआ, कसरती बदन वाला नवयुवक मेरे सामने नंगा खड़ा था, उसका खुला सीना ही किसी लड़की को व्याकुल बनाने के लिए काफ़ी था.

अब यहाँ तो उसकी मजबूत जांघे भी नजर के सामने थी और उसके बीच में पूरे ज़ोर से उठा हुआ उसका लंड, ओह माई गॉड. अब मेरे सीने की धड़कने तेज हो गयी थी. अब मेरे संस्कार कह रहे थे कि मुझे तुरंत वहाँ से हट जाना चाहिए, लेकिन मेरा मन नहीं मान रहा था तो में वही रुक गयी और वो दिलकश नज़ारा देखती रही. अब खिड़की थोड़ी ही खुली थी, इसलिए उसका ध्यान नहीं था. अब वो तो अपने काम में मग्न था और लगा हुआ था.

अब उसका चेहरा भी देखने जैसा बना हुआ था, उसके चेहरे से सेक्स की तड़प स्पष्ट रूप से झलक रही थी. अब उसका लंड और मोटा और कड़क होता जा रहा था. फिर थोड़ी देर में उसके लंड से पानी निकल गया और वो ढीला हो गया. फिर में भी वहाँ से चली गयी तो तभी मुझे ख्याल आया, अब मेरी पेंटी भी गीली हो चुकी थी तो मैंने जाकर बदल ली. अब वो नज़ारा मेरे दिमाग़ से उतरता ही नहीं था. फिर में रात को पति देव के साथ सोने गयी तो तब भी मेरे दिमाग में यही मंडरा रहा था.

अब उस रात में बहुत गर्म हो गयी थी और अपने पति के ऊपर चढ़ गयी और फिर बाद में उनसे भी बहुत चुदवाया. फिर वो भी बोल उठे, आज तुझे क्या हुआ है? कोई ब्लू फिल्म तो नहीं देख ली? अब में क्या बोलूं? इससे बड़ी ब्लू फिल्म क्या देखती? तो मैंने कह दिया कि नहीं, ये तो आप कल से 10 दिन के टूर पर जाने वाले है ना इसलिए, तो वो हंस पड़े.

फिर दूसरे दिन सुबह ही वो टूर पर निकल गये. अब मेरा मन तो राजा में अटका हुआ था. अब मेरा मन उससे चुदवाने के लिए बड़ा तड़प रहा था, लेकिन उसे कहूँ भी कैसे? उसमें ख़तरा था, वो सुशील लड़का था, मुझे ठुकरा देगा और मेरी इज़्ज़त पर खरा हो जाएगा. फिर मैंने सोचा कि ऐसा कुछ करना होगा जिससे वही मुझे चोदने के लिए तरस जाए. फिर मैंने धीरज से काम लेना उचित समझा. फिर में स्नान करके निकली तो मेरे दिमाग में योजना बन चुकी थी.

मैंने अपने कपड़े में परिवर्तन करना शुरू किया. फिर मैंने एक लो-कट वाली मेरी पुरानी शादी के समय की ब्लाउज निकाली, उस समय की अपेक्षा अब मेरे बूब्स बड़े हो चुके थे. (रोज़ पति देव द्वारा मसले जो जाते थे) फिर जैसे तैसे करके अपने बूब्स को दबाकर मैंने वो ब्लाउज पहन लिया, वो लो-कट था तो मेरा क्लीवेज पूरा दिखता था और बूब्स दबाकर डालने से वो भी उभरकर बाहर दिख रहे थे और मैंने साड़ी भी इस तरह पहनी थी कि ये सारा खुला ही रहे, आँचल के पीछे ना छुप जाए. फिर मैंने कांच में अपने आप को देखा और संतुष्ट हुई और फिर ब्रेकफास्ट की तैयारियाँ करने लगी.

फिर थोड़ी देर के बाद मैंने डाइनिंग टेबल पर सब चीज़े प्लानिंग से रखी और राजा को नाश्ते के लिए बुला लिया. फिर वो आकर बैठा, लेकिन उसका ध्यान नहीं गया, वो तो अपनी पढ़ाई के ख्यालों में ही व्यस्त था. मैंने उसे सब आइटम थोड़ी ही दी थी, तो उतना तो वो झट से खा गया और और माँग लिया. फिर में मन ही मन अपने प्लान पर मुस्कुराई और उठकर खड़ी हुई और उसे परोसने के लिए उसके नजदीक गयी.

अब में उसके राईट साईड में थी और सारे आइटम उसके लेफ्ट साईड में थे, तो में वहीं खड़ी होकर आगे झुककर आइटम उठाने लगी, स्वाभाविक है मेरे बूब्स उसके मुँह के एकदम नजदीक आ गये थे. तो उसकी नजर उन पर पड़ी और वो देखता ही रह गया, उभरे हुए गोरे-गोरे बूब्स और लो- कट से दिखता पूरा क्लीवेज. अब उसकी नजर चिपकी ही रह गयी थी. अब में ऐसे बिहेव कर रही थी जैसे मुझे कुछ पता ही नहीं हो.

फिर मैंने एक लंबी साँस भरी और हल्के से छोड़ी, जिससे मेरी छाती भर आई तो मेरे बूब्स की मूव्मेंट भी हुई. अब उसे ध्यान ही नहीं रहा था कि मैंने उसकी प्लेट परोस दी है. तभी मैंने उससे कहा कि देवर जी, नाश्ता कीजिए ना? तो वो चौंका और अपनी नजर हटाकर खाने लगा, लेकिन मेरी नजर उस पर लगी हुई थी. अब वो बार-बार मेरे स्तन को देख रहा था. अब में अपने प्लान में सफल हो रही थी. अब मैंने उसके मन में बीज बो दिया था.

दूसरे दिन से में रोज अपने कपड़े में एक कदम आगे जाने लगी. फिर दूसरे दिन से मैंने ऐसा ही लो-कट मगर स्लीवलेस ब्लाउज पहन लिया. अब उसे मेरी गोरी बाहें भी देखने को मिलती थी. फिर तीसरे दिन मैंने एकदम पारदर्शी ब्लाउज पहन ली, जिसमें से मेरी काली ब्रा साफ दिखाई देती थी. अब वो रोज चोरी छुपे मेरे स्तन को देखता था. फिर चौथे दिन से मैंने ब्रा पहनना ही छोड़ दिया, मेरा ब्लाउज तो पारदर्शी, स्लीवलेस और लो-कट था ही.

फिर उस रात को मैंने अपने ब्लाउज को साईड से भी शेप देकर ऐसा बना दिया कि क्लीवेज के अलावा बूब्स की साईड के भी दर्शन होने लगे और फिर उसे पाँचवे दिन पहना. अब जब में उसे परोसती थी, तो दूसरी और रखे हुए आइटम उठाने के लिए इतना झुकती थी कि उसकी गर्म साँस मेरे स्तन को टच होती थी, कभी-कभी तो उसका चेहरा मेरे बूब्स को टच हो जाए, इतना झुक लेती थी. अब मुझे उसकी आँखो में तरस नजर आती थी, में जानती थी कि में कामयाब हो रही हूँ. फिर छठे दिन मैंने अपनी साड़ी भी एकदम नीचे पहन ली, में अच्छी तरह से तैयार भी हुई थी.

फिर रोज की तरह वो मेरे उभरे हुए दोनों बूब्स को देखता रहा और में उन्हें लंबी साँस लेकर ऊपर नीचे करती रही. अब मैंने अपने ब्लाउज का हुक ढीला कर रखा था, जो थोड़ी साँस लेने के बाद टूट गया था. अब मेरे दबे हुए स्तन उछलकर सामने आ गये थे तो मैंने शरमाने का नाटक किया और अपने रूम में जाकर हुक को ठीक तरह से लगाकर वापस आ गयी. अब उसकी हालत तो देखने जैसी हो गयी थी.

फिर उसी दिन दोपहर को में हॉल में ही सो गयी, मैंने कहानियों एक की किताब लाकर रखी थी, जो देवर भाभी के नाजायज़ संबंध पर थी, उसमें जहाँ दोनों के सेक्स संबंध का खुला ब्योरा था, वहाँ तक पेज खोलकर उल्टी करके रख दी, जैसे में वहाँ तक पढ़ते हुए सो गयी हूँ और ऐसे सोने का नाटक करते हुए में लेटी थी. अब मैंने अपनी साड़ी घुटनों तक सरकाकर रखी थी.

रोज की चाय का समय हुआ, लेकिन में जानबूझकर नहीं उठी. तभी थोड़ी देर इंतज़ार करने के बाद राजा चाय के लिए बताने बाहर आया तो उसने आकर देखा कि में सोई हुई हूँ. तो वो मेरे नजदीक आया और किताब उठाई और जैसे ही वो पढ़ने लगा, तो वो उत्तेजित होने लगा. उस किताब में देवर भाभी के बीच सेक्स का ही खुला खुला ब्योरा था. अब उसकी वासना भड़क उठी थी. तभी इतने में मैंने करवट बदलने का बहाना किया और करवट बदलते-बदलते मैंने मेरा बायाँ (लेफ्ट) पैर भी घुटनों से ऊँचा किया. अब मेरी साड़ी जो पहले से ही घुटनों तक थी, अब मेरी कमर तक गिर पड़ी थी. अब मेरी गोरी जाँघें पूरी तरह से दिख रही थी.

फिर मैंने हल्की सी अपनी आँखें खोली तो मैंने देखा कि उसका लंड एकदम खड़ा हो गया था, उसने चड्डी (शॉर्ट्स) पहन रखी थी और अपने एक हाथ में किताब पकड़े हुए था और अपना दूसरा हाथ उसने अपनी चड्डी में नीचे से डाल दिया था और अपने खड़े लंड को मजबूती से पकड़ लिया था.

वो थोड़ी देर तक उस किताब को पढ़ता रहा और मेरी जाँघ और बूब्स की तरफ देखता रहा. फिर मैंने देखा कि उसने अपना दूसरा हाथ बाहर निकालकर मेरी तरफ बढ़ाया. तो में खुश हो गयी और अपनी आँखें बंद करके इंतज़ार करने लगी, लेकिन कुछ नहीं हुआ. फिर मैंने अपनी आँखें खोली तो वो वहाँ नहीं था, उसकी हिम्मत नहीं हुई थी और अब वो अपने रूम में चला गया था, हाँ वो किताब अवश्य ले गया था. फिर में उठी और उसके रूम की तरफ गयी, तो वो दरवाज़ा बंद करके फिर से हस्थमैथुन कर रहा था, आज तो उसने अपना लंड घोड़े जैसा किया हुआ था.

अब मुझे बहुत अफसोस हो रहा था कि जिसे मेरी चूत में होना चाहिए था, वो लंड उसके हाथों में था. लेकिन मुझे भी तो ओपन नहीं होना था तो में मजबूरी में उसे देखती रही. फिर थोड़ी देर में उसके लंड से फव्वारा निकला और वो शांत हुआ. फिर उस रात मैंने सातवें दिन का प्लान बना लिया. अब में उसके दिल में वासना तो जगा ही चुकी थी, अब तो हिम्मत करवाना ही बाकी था.

सातवें दिन सुबह मैंने अपने रूम का फ्यूज निकाल दिया और गीजर खराब है कहकर उसके अटेच बाथरूम में नहाने का प्लान बना लिया. अब में अपने कपड़े लेकर अंदर चली गयी थी और फिर थोड़ी देर के बाद नाहकर बाहर निकली तो मेरे बदन पर सिर्फ़ टावल लपेटा था और ऊपर मेरी निप्पल से शुरू करके चूत तक टावल से बदन ढका था. अब मेरे निप्पल से ऊपर के स्तन का भाग और चूत के नीचे की टाँगे सब खुली थी, मेरे सिर के बाल गीले थे और मेरे गोरे बदन पर पानी सरक रहा था, जब में काफ़ी सेक्सी लग रही होगी. जब गर्मी बहुत थी तो वो सिर्फ़ चड्डी पहनकर पंखे के नीचे खड़ा था.

फिर उसने मुझे देखा तो बस देखता ही रह गया, उसने मुझे इतना नंगा आज ही देखा था. फिर में उधर ही खड़ी रही और अब वो भी अपनी सारी शर्म छोड़कर मुझे देख रहा था. फिर मैंने उसके बेड पर वो किताब पड़ी देखी तो उससे पूछ लिया कि कैसी लगी ये कहानी?

उसने कहा कि बड़ी रोचक है, लेकिन ऐसा तो कहानियों में ही होता है ना? तो मैंने कहा कि कहानियाँ भी तो समाज से मिलती है ना और महेश ने हिम्मत की तो हंसा को पाया (महेश और हंसा उस किताब में देवर भाभी के नाम थे) आख़िर शुरुआत तो मर्द को ही करनी पड़ती है, हंसा की भी वही इच्छा थी, लेकिन महेश ने शुरू किया तो उसने साथ दिया ना. तो वो बात को समझा और मेरे नजदीक आया. अब में समझ गयी थी, अब मेरा काम हो गया था. फिर मेरे नजदीक आकर उसने अपने दोनों हाथ उठाए और मेरे फैले हुए गीले बालों मे पसारते हुए अपने हाथों को मेरे दोनों कान पर रखा और मेरा चेहरा ऊँचा किया.

अब में भी वासना भरी नजर से उसको देख रही थी. फिर वो थोड़ा झुका और मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए. तो में रोमांचित हो उठी और मैंने उसे अपने होंठो को चूसने दिया और कोई विरोध नहीं किया. तो उसकी हिम्मत बढ़ी और मुझे करीब खींचा. तो में भी उसके नजदीक सरकी, लेकिन सरकने से पहले अपने एक हाथ से सफाई से अपना टावल खोल डाला तो मेरा टावल खुलते ही नीचे गिर पड़ा.

अब में पूरी नंगी थी और वो सिर्फ़ चड्डी पहने हुए था. फिर में उसके नजदीक जाकर उससे चिपक गयी. फिर उसने किस थोड़ी तेज किया, लेकिन वो नया था तो उसे बराबर आता नहीं था इसलिए फिर मैंने भी अपना काम शुरू किया और अपने होंठ और जीभ से उसे रेस्पॉन्स दिया. सीखने में फास्ट था तो वो तुरंत समझ गया और फिर हम दोनों एक लंबी अच्छी किस में खो गये.

अब हमारे होंठ से होंठ और जीभ से जीभ मिल गये थे और फिर हम रसपान करते रहे. अब मैंने अपनी बाहें उसके गले में डाल दी थी. अब उसकी बाहें मेरी पीठ पर चल रही थी. तभी मैंने उससे कहा कि अपने दोनों हाथों को सिर्फ़ यूँ ही मत फैरो, उनसे मुझे तुम्हारी और दबाओ, तो उसने थोड़ा ज़ोर बढ़ाया. अब मेरे स्तन और निपल्स उसके सीने से चिपक गये थे. अब उसे भी मज़ा आया था, तो उसने थोड़ा और ज़ोर बढ़ा दिया. अब में दब जाने लगी थी और उसे भी आनंद आने लगा था.

तभी में बोल उठी क्रश मी राजा, क्रश मी. फिर उसने एकदम से अपना ज़ोर बढ़ा दिया. अब उसने मुझे क्रश ही कर दिया था, अब मेरे स्तन तो उसके सीने से दबकर मानो चौपट ही हो गये थे और मेरी निप्पल भी पिंच कर रही थी, लेकिन मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था, आहह वैसे भी मुझे ये बहुत पसंद है, क़िसी मर्द की बाहों में क्रश होकर चूर-चूर होने का नशा तो कोई औरत ही समझ सकती है. फिर वो मुझे पीसता रहा और मेरे होंठ चूसता रहा. फिर वो अपनी पकड़ थोड़ी ढीली करके मेरे होंठो को छोड़कर नीचे उतरने लगा और मेरी गर्दन पर, फिर मेरे कंधो पर किस करने लगा था. अब उसे कुछ सीखाने की जरूरत नहीं थी, अब उसके अंदर का मर्द जाग उठा था और वो अपना काम जानता था.

फिर वो नीचे उतरा और मेरे स्तनों को किस करना शुरू किया, उसे सहलाता था, दबाता था, मसलता था, खेलता था, चूसता था, निपल्स को काटता था और अंत में मेरे एक निपल को अपने मुँह में लेकर ज़ोर से चूसने लगा और दूसरे स्तन को बुरी तरह से मसलने लगा था. अब मुझे दर्द होने लगा था और मैंने दर्द की सिसकारियाँ भी मारी, लेकिन वो अब कहाँ कुछ सुनने वाला था? रोकूँ तो भी नहीं रुके. अब उसने बड़ी बेरहमी से मेरे दोनों बूब्स मसल डाले थे. अब मेरे अंग-अंग में आग लग गयी थी और मेरा बदन गर्म हो उठा था और उसे चाहने लगा था. अब वो किस करते हुए और नीचे उतरने लगा था, लेकिन उसने अपने हाथ तो मेरे बूब्स पर ही टिका रखे थे. फिर मेरी कमर पर किस करते हुए जांघों को छुते हुए वो मेरी चूत के निकट जा पहुँचा और वहाँ जाकर थोड़ा उलझा और रुका, यह उसके लिए नई चीज थी.

फिर मैंने प्यार से उसके सिर पर अपना हाथ फैरा और अपनी दोनों टाँगे फैलाई और उसके सिर को पकड़कर उसके होंठो को मेरी चूत पर जा ठहराया तो वो किस करने लगा. फिर उसने थोड़ी देर किस की, तो मैंने इशारा किया और फिर हम दोनों बेड पर चले गये. अब में अपनी दोनों टाँगे पूरी फैला सकती थी. तो तभी वो फिर से मेरी चूत पर गया और मैंने उससे कहा कि जीभ से काम लो, होंठ से नहीं, मेरा इतना इशारा काफ़ी था कि इतने में वो फिर से शुरू हो गया और मेरी चूत चाटने लगा.

मैंने अपने हाथ से मेरी चूत के लिप्स थोड़े फैलाकर उसकी जीभ अंदर डलवाई. अब वो सीख गया था तो उसने मेरे हाथ हटाए और फिर पूरी जिम्मेदारी संभाल ली. अब वो मेरी चूत के अंदर बड़ी सफाई से चाटे जा रहा था. अब में तो पहले ही गर्म हो चुकी थी और अब पूरी तरह से गर्म हो गयी थी. अब मेरा बदन उसके लिए तड़प रहा था, अब मुझे उसका लंड मेरी चूत के अंदर चाहिए था. अब मेरे बदन में एक करंट सा उठ रहा था.

फिर मैंने एक कड़क अंगड़ाई ली और उसका मुँह वहाँ से हटाया और उससे कहा कि अब मेरी बारी है और में जो अब तक लेटी थी उठकर बैठ गयी थी और उसकी चड्डी उतारी, तो उसका पूरे कद का लंड स्प्रिंग की तरह बाहर उछल आया था.

मैंने उसके बॉल्स के पास से किस करना शुरू किया और फिर उसके चारों तरफ किस किया और फिर उसके लंड के माथे के पास पहुँची और तब अपनी दोनों हथेलियों के बीच में उसके लंड को लेकर उसे रगड़ डाला, जैसे हम लस्सी बनाते समय घुमाते है इससे लंड एकदम जल्दी से तैयार हो जाता है और अब मुझे भी तो चुदवाने की जल्दी लगी हुई थी. (नहीं तो में आराम से उसका लंड चूसती रहती) अब उसका लंड और बड़ा हो गया था. फिर मैंने उसके लंड के टोपे की चमड़ी हटाई और उसके गुलाबी टोपे को अपने मुँह में ले लिया और थोड़ी देर तक चूसा तो मैंने देखा कि उसे कोई ब्लोवजोब की जरूरत नहीं है, तो उसे नीचे चूत की तरफ धकेल दिया और फिर में वापस से लेट गयी और उसे मेरे ऊपर खींच लिया.

फिर मैंने अपने दोनों पैर चौड़े किए और उसका लंड मेरी चूत पर रख दिया. तभी उसने एक धक्का मारा तो उसका लंड मेरी चूत के अंदर चला गया, इसके लिए तो ये सारा खेल था. फिर उसने मुझे चोदना शुरू किया, उसका लंड काफ़ी बड़ा और गर्म था. अब में अंदर कुछ अलग ही महसूस कर रही थी. अब मुझे दर्द भी हो रहा था और मज़ा भी आ रहा था.

थोड़ी देर के बाद उसकी स्पीड बढ़ी, तो में चिल्लाने लगी राजा आज बुरी तरह चोद मुझे, फाड़ डाल इस रंडी की चूत को, चोद राजा, चोद. अब मेरे मुँह से ऐसे शब्द सुनकर वो हैरान हो गया था, लेकिन फिर मुस्कुराया और बोला कि घबराओ मत, आज नहीं छोडूंगा, एक हप्ते से मेरी नींद हराम कर रखी है, आज तो तेरी चूत फाड़कर ही रहूँगा और फिर वो मुझे चोदता रहा, चोदता रहा और चोदता ही रहा. फिर उस दिन उसने मुझे बहुत ज़ोर से चोदा. अब हम दोनों को बड़ा मज़ा आया था और फिर थोड़ी देर तक चुदाई करने के बाद हम दोनों थककर लेट गये. फिर उसके बाद तो हमारे पास 3 दिन और थे और अब तो पटाने की बात भी नहीं थी. फिर हमने पूरा समय एक साथ ही गुज़रा और ना जाने कितनी बार उसने मुझे चोदा? आज भी मौका मिलने पर हम चुदाई का भरपूर आनंद उठाते है और खूब मजा करते है.

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *